Charitraheen
Sarat Chandra Chattopadhyay
Rated: 4.00 of 5 stars
4.00
· 12 ratings · 351 pages · Published: 04 Nov 1989
फिर भी क्या वह दिवाकर को पूरी तरह पा सकी? क्या किरणमयी और दिवाकर उपेंद्र के कोप भाजन नहीं बने? अथवा सचाई जान समझ कर उपेंद्र ने दोनों प्रेमी युगलों को क्षमा कर दिया? सात्विक प्रेम और वासनामय प्रेम के बीच नारी की वेदना को रेखांकित करने वाले भारतीय साहित्यकार शरतचंद्र का बहुचर्चित उपन्यास ‘चरित्रहीन’ इन्हीं प्रश्नों का मार्मिक समाधान है, जिसे आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे।