Charitraheen

Sarat Chandra Chattopadhyay


Rated: 4.00 of 5 stars
4.00 · 12 ratings · 351 pages · Published: 04 Nov 1989

Charitraheen by Sarat Chandra Chattopadhyay
बासे (आवास गृह) की नौकरानी और पति परित्यक्ता सावित्री और सतीश एकदूसरे को बहुत चाहते थे, फिर भी न जाने क्यों वे एकदूसरे से दूर रहते थे- एक दिन सतीश के परम हितैषी उपेंद्र ने सावित्री को सतीश के आवास पर क्या देख लिया कि वे उपेंद्र के कोप भाजन बन गए। दूसरी ओर शादीशुदा किरणमयी उपेंद्र के छोटे भाई और अपने से कई वर्ष छोटे दिवाकर को ले कर रातोंरात सात समुद्र पार के लिए चल पड़ी।
फिर भी क्या वह दिवाकर को पूरी तरह पा सकी? क्या किरणमयी और दिवाकर उपेंद्र के कोप भाजन नहीं बने? अथवा सचाई जान समझ कर उपेंद्र ने दोनों प्रेमी युगलों को क्षमा कर दिया? सात्विक प्रेम और वासनामय प्रेम के बीच नारी की वेदना को रेखांकित करने वाले भारतीय साहित्यकार शरतचंद्र का बहुचर्चित उपन्यास ‘चरित्रहीन’ इन्हीं प्रश्नों का मार्मिक समाधान है, जिसे आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे।

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